KabirPrakatDiwasNotJayanti
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कबीर जयन्ती न मनाकर प्रकट दिवस क्यो मनाया जाता है?
पूर्ण परमात्मा कबीर जी के अलावा सभी देव जन्म-मृत्यु में हैं और प्रकट दिवस सिर्फ अविनाशी परमात्मा का ही मनाया जाता है क्योंकि वह जन्म नहीं लेते बल्कि हर युग में कमल के फूल पर प्रकट हुए ,
कबीर साहेब चारो युगों में प्रकट होकर पृथ्वी लोक पर आते हैं। उनका कभी माँ के गर्भ से जन्म नहीं होता। कमल के फूल पर प्रकट होते हैं। इसीलिए इसे जयंती नही प्रकट दिवस के रूप में मनाया जाता है।
🎆कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है, जयंती नहीं!
सन् 1398 (विक्रमी संवत् 1455) ज्येष्ठ मास शुद्धि पूर्णमासी को ब्रह्ममूहूर्त में अपने सत्यलोक से सशरीर आकर परमेश्वर कबीर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर विराजमान हुए।
कबीर प्रकट दिवस ओर जयन्ती मे क्या अन्तर है ?
कबीर जयंती और कबीर प्रकट दिवस में अंतरजो जन्मता है उसकी जयंती मनाई जाती है,
जो अजन्मा है, स्वयंभू है, वह प्रकट होता है।उनकाप्रकटदिवस मनाया जाता हे, जेसे कबीर साहेब, अमर पुरूष लीला करते हुए बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होते हैं।
*गरीब, भक्ति मुक्ति ले उतरे, मेटन तीनूं ताप।*
*मोमन के डेरा लिया, कहै कबीरा बाप।।*
पूर्ण परमात्मा कबीर जी का जन्म कभी मां के गर्भ से नहीं होता इसलिए उनका प्रकट दिवस मनाया जाता है वह कबीर देव (कबीर परमेश्वर) जी मैं अपनी वाणी मैं कहा है
अधिक जानकारी के लिए देखें साधना टीवी शाम 7:30 से
सिर्फ कबीर जी का ही प्रकट दिवस मनाया जाता है?
पुस्तक ग्यान गंगा


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