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कावड यात्रा के फ़ायदे

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कावड़ यात्रा क्यों लाते है हर साल श्रावण मास में करोड़ो की तादाद में कांवडिये सुदूर स्थानों से आकर गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं इस यात्राको कांवड़ यात्रा बोला जाता है। कावड़ यात्रा द्वारा लाया जल श्रावण की चतुर्दशी के दिन उस गंगा जल से अपने निवास के आसपास शिव मंदिरों में शिव का अभिषेक किया जाता है। कहने को तो ये धार्मिक आयोजन भर है, लेकिन इसके सामाजिक सरोकार भी हैं। कांवड के माध्यम से कांवड के माध्यम से जल की यात्रा का यह पर्व सृष्टि रूपी शिव की आराधना के लिए हैं। पानी आम आदमी के साथ साथ पेड पौधों, पशु - पक्षियों, धरती में निवास करने वाले हजारो लाखों तरह के कीडे-मकोडों और समूचे पर्यावरण के लिए बेहद आवश्यक वस्तु है। उत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति को देखें तो यहां के मैदानी इलाकों में मानव जीवन नदियों पर ही आश्रित है। क्या कावड़ यात्रा करना सस्त्रो में लिखा बिल्कुल नही कावड़ यात्रा करना एक आडंबर है जो लोग अपने मस्ती के लिए करते है भगवान शिव को खुश कैसे करें भगवान शिव को खुश करने के लिए सस्त्रो के अनुसार भक्ति करनी चाहिए ...
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                                    दीपावली दीपावली हिन्दू धर्म का एक ऐसा त्योहार है जिसे साल में एक बार मनाया जाता है? दीपावली का त्योहार कबसे मनाया जाता है? दीपावली का त्यौहार हमारे बुजुर्गों के माध्यम से ओर रामायण के माध्यम से पता चला कि रामचन्द्र जी ने रावण पर विजय प्राप्त कर 14 वर्ष बाद वन से अयोध्या आये थे इस  खुशी में पूरी अयोध्या नगरी को दीपमालाओं से सजाया गया इसी लिए आज भी हम दीपावली मनाते है ।  लेकिन आज की दीपावली में ओर उस समय की दीपावली मे रात दिन का अंतर है पहले दीप जला कर खुशियां व्यक्त की जाती थी और आज आतिशबाजी करके वातावरण को अशुद्ध करते है आतिशबाजी से नुकसान? आतिशबाजी करने से वातावरण में जहरीली गैस गुलमिल जाती है जिससे काफ़ी नुकसान होता पर्यावरण तथा पशु-पक्षी को ओर मनुष्य को बीमारी का सामना करना पड़ता है  आध्यत्मिक दृष्टिकोण से देखें तो कही भी नही लिखा कि हमें दीपावली मनानी जरूरी नही है   हमें किसकी भक्ति करनी चाहिए ? हमें शास्त्रों के ...