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Showing posts from June, 2020

मोक्ष पाना आसान है या मुश्किल

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मोक्ष पाना आसन हे या मुश्किल?  मोक्ष पाना आसान भी  है ओर मुश्किल भी, आइए जानते है  मोक्ष पाना कैसे मुश्किल है पवित्र चारो वेद मे भी प्रमाण है  पुर्ण परमात्मा की भक्ति कर के ही  मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है व (ॐ तत् सत्) के नाम जाप से हीँ   मोक्ष संभव है तथा यह नाम देने के अधिकारी सिर्फ़ सन्त रामपाल जी महाराज ही हैं जेसा कि हम सब जानते ही हे कि केसे नकली साधु महात्मा तथा नकली गुरुगुरुओ द्वारा शाश्स्त्र के विरुद्ध भक्ति बताने पर लोग सच्ची भक्ती को त्याग देते हैं ओर शाश्त्र विरुद्ध भक्ती करने लग जाते हैं ओर मोक्ष पाना मुश्किल होता है जबकि वेदो मे प्रमाण है कि शास्त्र अनुकूल साधना करने से ही पुर्ण मोक्ष होता है मोक्ष पाना आसान केसे हे मोक्ष पाना के लिए हमे पुर्ण संत कि तलाश करनी चाहिए, जो की हमे शाश्त्र अनुकुल भक्ति बताये, ओर मोक्ष का मार्ग दिखाये, वह सन्त वर्तमान समय में सन्त रामपाल जी महाराज ही हैं जो वेदो शास्त्र अनुसार भक्ति बताकर पुर्ण मोक्ष मार्ग बता रहे हैं तथा  पुर्ण संत से नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर सत भक्ति करने स...

जन्माअष्टमी

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जन्माअष्टमी क्या है ? जन्माअष्टमी वह है की जिसका जन्म अष्टमी को हुआ हो जेसे की कृष्ण भगवान  का जन्म अष्टमी को हुआ था इसलिए  कृष्ण जन्माअष्टमी मनायी जाती है  भगवान कृष्ण जी का जन्म माता देवकी के गर्भ से हुआ था बल्कि वेद प्रमाणित करते हैं पुर्ण परमात्मा किसी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते , पुर्ण परमात्मा सशरीर आते हैं प्रथ्वी पर तथा लीला करते हैं तो वह पुर्ण परमात्मा कोन है जानने के लिए आगे पढ़े विष्णु जी के अवतार श्री कृष्ण जी का जन्म ? विष्णु जी के अवतार कृष्ण जी श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। इसलिए इस दिन को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। पूरे भारतवर्ष में आज 3 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है। कोई कृष्ण को लल्ला, कान्हा, माखनचोर, सांवलिया, लड्डू गोपाल तो कोई कृष्णा कह कर प्रेम से पुकारता है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की जन्म नगरी मथुरा भक्ति के रंगों में जीवंत हो जाती है।    प्रत्येक त्योहार में लोकवेद की अहम भूमिका रही है। लोकवेद के अनु...

Holy Bible

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                                                                    पवित्र बाइबल केअनुसार वह प्रभु कोन है?  पवित्र बाइबिल अय्यूब 36: 5 के अनुसार पूर्ण परमात्मा अय्यूब 36:5 (और्थोडौक्स यहूदी बाइबल - OJB) परमेश्वर कबीर (शक्तिशाली) है, किन्तु वह लोगों से घृणा नहीं करता है। परमेश्वर कबीर (सामर्थी) है और विवेकपूर्ण है। बाइबल ने भी स्पष्ट किया है की प्रभु का नाम कबीर है। अनुवाद कर्ताओ नें कबीर की जगह शक्तिशाली व सामर्थ वाला लिख दिया है। वास्तव में परमात्मा का नाम कबीर है। वेदो में, भगवद गीता में, श्री गुरु ग्रंथ साहिब में और कुरान शरीफ में भी परमात्मा का नाम कबीर है।  पवित्र बाइबल मे परमात्मा साकार है या निराकार? पवित्र बाईबल में प्रभु मानव सदृश साकार का प्रमाण >> पवित्र बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1:20 - 2:5 पर) छटवां दिन:- प्राणी और मनुष्य: अन्य प्राणियों की रच...

GodKabir_PrakatDiwas_2020

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 🌺कबीर परमेश्वर का जन्म नहीं होता है 🌼 हिन्दू मुस्लिम के बीच में, मेरा नाम कबीर।  आत्म उद्धार कारणे, अविगत धरा शरीर।। अपनी प्यारी आत्माओं का उद्धार करने के लिए कबीर परमात्मा एक पृथ्वी पर प्रकट होते हैं। नीरू-नीमा(नि:सन्तान दम्पत्ति थे) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए गए हुए थे। वहां नीरू - नीमा को कमल के फूल पर शिशु रूप में कबीर परमात्मा मिले थे।इस लीला को ऋषि अष्टानन्द जी ने आंखों देखा। वहाँ से, गरीब, गोद लिया मुख चूंबि कर, हेम रूप झलकंत। जगर मगर काया करै, जैसे दमकैं पदम अनंत।। गरीब, काशी उमटी गुल भया, मोमन का घर घेर। कोई कहै ब्रह्मा बिष्णु हैं, कोई कहै इन्द्र कुबेर।। कबीर परमेश्वर शिशु रूप में काशी में अवतरित हुए तो उनको देखने के लिए पूरी काशी के लोग उमड़ उमड़ कर आ रहे थे। ऐसा अद्भुत बच्चा उन्होंने आज तक नहीं देखा था। बच्चे का शरीर सफेद बर्फ की तरह चमक रहा था, पूरी काशी कबीर परमात्मा के नवजात रूप को देखने को उमड़ पड़ी‌ थी। स्त्री-पुरूष झुण्ड के झुण्ड बनाकर मंगल गान गाते हु...

KabirPrakatDiwasNotJayanti

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KabirPrakatDiwasNotJayanti कबीर जयन्ती न मनाकर प्रकट दिवस क्यो मनाया जाता है? पूर्ण परमात्मा कबीर जी के अलावा सभी देव जन्म-मृत्यु में हैं और प्रकट दिवस सिर्फ अविनाशी परमात्मा का ही मनाया जाता है क्योंकि वह जन्म नहीं लेते बल्कि हर युग में कमल के फूल पर प्रकट हुए , कबीर साहेब चारो युगों में प्रकट होकर पृथ्वी लोक पर आते हैं। उनका कभी माँ के गर्भ से जन्म नहीं होता। कमल के फूल पर प्रकट होते हैं। इसीलिए इसे जयंती नही प्रकट दिवस के रूप में मनाया जाता है। 🎆कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है, जयंती नहीं! सन् 1398 (विक्रमी संवत् 1455) ज्येष्ठ मास शुद्धि पूर्णमासी को ब्रह्ममूहूर्त में अपने सत्यलोक से सशरीर आकर परमेश्वर कबीर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर विराजमान हुए। कबीर प्रकट दिवस ओर जयन्ती मे क्या अन्तर है ?   कबीर जयंती और कबीर प्रकट दिवस में अंतरजो जन्मता है उसकी जयंती मनाई जाती है, जो अजन्मा है, स्वयंभू है, वह प्रकट होता है।उनकाप्रकटदिवस मनाया जाता हे, जेसे कबीर साहेब, अमर पुरूष लीला करते हुए बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होते हैं।   ...

DeepKnowlegde_Of_God

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DeepKnowlegde_Of_GodKabir        जीव हमारी जाति है,मानव धर्म हमारा।         हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई,            धर्म नहीं कोई न्यारा।।            हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई,            आपस में सब भाई-भाई।            आर्य जैनी और विश्‍नोई,            एक प्रभु के बच्चे सोई।। पुर्ण परमात्मा कि शरण मे जाने से सारे पाप कर्म केसे कटते है ? वर्तमान समय मे सभी धर्म के धर्मगुरुओं ने आज तक यही बताया है कि परमात्मा/रब/गॉड/अल्लाह/खुदा निराकार है, उसका केवल प्रकाश देखा जा सकता है। लेकिन सर्वप्रथम कबीर जी ने इसका खंडन करते हुए बताया कि परमात्मा/अल्लाह/गॉड साकार है, नराकार है। कबीर साहेब जी ने कहा है कि मनुष्य जन्म बहुत अनमोल है इसे शास्त्र विरुद्ध साधना करके व्यर्थ नहीं करना9 चाहिए,  कबीर परमेश्वर ने ही बताया था कि परमात्मा सभी पापों से मुक्त कर सकता है।वही ग्यान आज संत रामपाल जी महाराज ने...

DivinePlay_Of_GodKabir

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पुर्ण परमात्मा कबीर साहेब किस किस को मिले ?       बिठल होकर रोटी खाई, नामदेव की कला बढ़ाई।     पुंण्डरपुर नामा प्रवान, देवल फेर छिवा दई छान।।  1.कोढ़ की असहनीय पीड़ा से दुखी सैकड़ों व्यक्तियों को.         परमात्मा ने रोगमुक्त किया और अपनी शरण में लिया द्रोपदी का चीर बढ़ाना  2.एक बार द्रौपदी ने अंधे महात्मा को अपनी साड़ी के कपड़े में से टुकड़ा दिया था क्योंकि अंधे महात्मा की कोपीन पानी में बह गई थी। साधु ने आशीर्वाद अनंत चीर पाने का आशीर्वाद दिया। कबीर परमात्मा ने चीरहरण में द्रौपदी का चीर बढ़ाकर लाज बचाई।। द्रोपदी का चीर भी परमात्मा कबीर जी ने बढ़ाया। द्रोपदी श्री कृष्ण की भक्त थी। इसलिए बड़ाई कृष्ण को मिली। 3.बली राजा की यज्ञ में बावना बने। फिर विशाल रूप किया। गज तथा मगरमच्छ युद्ध कर रहे थे तो उनकी भी गति भक्ति अनुसार की।      गरीब, पीतांबर कूं पारि करि, द्रौपदी दिन्हीं लीर।        अंधे कू कोपीन कसि, धनी कबीर बधाये चीर।।  4.गोरख नाथ को भी पुर्ण परमात्मा मिले व ज्ञ...

Miracles_Of_GodKabir

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 "पुर्ण परमात्मा कोन है? कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा हैं  तथा वह परमात्मा आयु भी बढ़ा सकता है  यह वेदो मे भी प्रमाण है वेद प्रमाण करते है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी अपने साधक की आयु भी बड़ा देते है और भयानक बीमारी भी ठीक कर देते हैं तथा मुर्दे को भी जीवित कर सकते हैं मुर्दे को जीवित करना ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 में प्रमाण मिलता है कि पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है ! कबीर साहिब ने सिकंदर लोधी द्वारा काटी हुई ग्रभवती गऊ को जीवित करने के बाद कहा-   "गऊ अपनी अम्मा है, इस पर छुरी न बाह।    गरीबदास घी दूध को, सब ही आत्म खाय।।                 "चुटकी तारी थाप दे, गऊ जिवाई बेगि।        "गरीबदास दूझन लगी, दूध भरी है देग।।" शेखतकी ने कबीरसाहेब को कहा कि अगर आप अल्लाह हो तो मेरी इस मृत लड़की को जीवित कर दो तब कबीर साहेब ने शेखतकी की मृत लड़की को कब्र से निकालकर जीवित कर किया था और उस लड़की...