जन्माअष्टमी

जन्माअष्टमी क्या है ?



जन्माअष्टमी वह है की जिसका जन्म अष्टमी को हुआ हो जेसे की कृष्ण भगवान  का जन्म अष्टमी को हुआ था इसलिए  कृष्ण जन्माअष्टमी मनायी जाती है 

भगवान कृष्ण जी का जन्म माता देवकी के गर्भ से हुआ था बल्कि वेद प्रमाणित करते हैं
पुर्ण परमात्मा किसी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते ,
पुर्ण परमात्मा सशरीर आते हैं प्रथ्वी पर तथा लीला करते हैं
तो वह पुर्ण परमात्मा कोन है जानने के लिए आगे पढ़े


विष्णु जी के अवतार श्री कृष्ण जी का जन्म ?

विष्णु जी के अवतार कृष्ण जी श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। इसलिए इस दिन को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। पूरे भारतवर्ष में आज 3 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है। कोई कृष्ण को लल्ला, कान्हा, माखनचोर, सांवलिया, लड्डू गोपाल तो कोई कृष्णा कह कर प्रेम से पुकारता है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की जन्म नगरी मथुरा भक्ति के रंगों में जीवंत हो जाती है।
   प्रत्येक त्योहार में लोकवेद की अहम भूमिका रही है।
लोकवेद के अनुसार जन्माष्टमी में स्त्री-पुरुष बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। और रासलीला का आयोजन होता है।

  व्रत करना गीता अनुसार कैसा है?


श्रीमद्भगवत् गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में व्रत/उपवास करने को मना किया गया है कि हे अर्जुन! यह योग (भक्ति) न तो अधिक खाने वाले की और न ही बिल्कुल न खाने वाले की अर्थात् यह भक्ति न ही व्रत रखने वाले, न अधिक सोने वाले की तथा न अधिक जागने वाले की सफल होती है। इस श्लोक में व्रत रखना पूर्ण रुप से मना है। जो ऐसा कर रहे हैं वह शास्त्र विरुद्ध साधना कर रहे हैं।

द्वापरयुग में लिया कृष्ण अवतार


द्वापरयुग में कृष्ण जी के 56 करोड़ की आबादी वाले यादव कुल का आपस में लड़ने से नाश हो गया था। जिसे श्रीकृष्ण जी लाख यत्न कर भी नहीं रोक पाए थे। इस सबसे दुखी होकर कृष्ण जी वन में एक वृक्ष के नीचे एक पैर पर दूसरा पैर रखकर लेटे हुए थे। वृक्ष की छाया में विश्राम कर रहे कृष्ण जी के एक एक पैर में पदम (जन्म से ही लाल निशान था) जो की सूर्य की रोशनी में हिरन की आंख की तरह चमक रहा था। शिकारी शिकार की तलाश में वन में घूम रहा था। तभी दूर से शिकारी ने देखा वहां पेड़ के नीचे हिरन है। उसने पेड़ की ओट लेकर ज़हर में बुझा हुआ तीर हिरन की आंख समझ कर छोड़ दिया और वह ज़मीन पर लेटे हुए कृष्ण जी के पैर में पदम पर जा लगा। तभी कृष्ण जी चिल्लाए कि हाय ! मर गया। शिकारी घबराया हुआ उनके पास दौड़ कर आया और देखकर रोने लगा। अपने अपराध की क्षमा याचना करने लगा। कृष्ण जी ने उससे कहा, आज तेरा बदला पूरा हुआ। शिकारी बोला हे महाराज ! कौन सा बदला? आपसे तो सभी प्रेम करते हैं। आप की और मेरी कोई दुश्मनी भी नहीं है? तब कृष्ण जी ने उसे त्रेतायुग वाला सारा वृत्तांत कह सुनाया और उससे कहा की तू जल्दी यहां से भाग जा वरना तुझे सब मार डालेंगे। बस मेरा संदेश अर्जुन तक पहुंचा दे की जल्दी मुझसे यहां आकर मिले। अर्जुन के वहां पहुंचने पर कृष्ण जी ने उसे यह कहा की आप पांचों भाई हिमालय पर जाकर तप करते हुए शरीर त्याग देना और कृष्ण जी तड़पते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए। अर्जुन वहां खड़ा खड़ा सोच रहा है कि यह कृष्ण भी बड़े बहरूपिया, छलिया थे। महाभारत के युद्ध के दौरान कह रहे थे कि अर्जुन तेरे दोनों हाथों में लड्डू है। युद्ध में मारा गया तो सीधा स्वर्ग जाएगा और जीत गया तो राजा बनेगा।

  कबीर, राम कृष्ण अवतार हैं, इनका नाहीं संसार।
  जिन साहब संसार किया,सो किनहु न जनम्यां नारि।।


 कृष्ण भगवान जी की प्रमुख लीलाये ?

कृष्ण भगवान जी की बाल लिलाओ के बारे में तो हम सब जानते ही हे केसे कृष्ण जी ने तारका तथा अन्य राक्षसो का संहार किया था ,तथा गोर्व्धन पुजा के के बारे में भी हम सब जानते ही हे

कृष्ण जी द्वारा इन्द्र देव की पुजा छुडवाना 



 स्वय श्री कृष्ण जी ने इन्द्र कि पुजा छुड़वाकर उस एक परमात्मा कि भक्ति करने के लिए  उन्होने  गोवर्धन पर्वत को उठाकर इन्द्र के प्रकोप से ब्रज वसियो कि रक्षा कि थी

  पुर्ण परमात्मा कोन है?    


पुर्ण परमात्मा की पहचान निम्न हे

1सशरिर प्रकट होना
2दोहो साखियो व वाणीयो के माध्यम से ग्यान बताना
3सशरीर वापस  अपने निगम स्थान सतलोक जाना

जब पुर्ण परमात्मा कि यह पह्चान ह तो वह परमात्मा कोन है
सभी तरह से खरा उतरने वाले वह महान पुर्ण परमात्मा कि खोज भी पूरी हुइ तथा वह परमात्मा....... कबीर परमेश्वर ह



 अनन्त कोटि ब्रह्मांड का, एक रती नही भार !
 सतगुरु पुरुष {परमात्मा}कबीर है, कुल के सृजनहार !!

वर्तमान समय में दोहो सखियो  व वेद के अनुसार  भक्ति सन्त रामपाल जी महाराज बता रहे है सन्त रामपाल जी महाराज के अलावा पुरे विश्व मे कोई सन्त नही है जो साशस्त्र अनुसार भक्ति बताये  व अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए साधना चैनल पर सत्संग शाम 7:30 बजे से 

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