GodKabir_PrakatDiwas_2020
🌺कबीर परमेश्वर का जन्म नहीं होता है 🌼
हिन्दू मुस्लिम के बीच में, मेरा नाम कबीर।
आत्म उद्धार कारणे, अविगत धरा शरीर।।
अपनी प्यारी आत्माओं का उद्धार करने के लिए कबीर परमात्मा एक पृथ्वी पर प्रकट होते हैं।
नीरू-नीमा(नि:सन्तान दम्पत्ति थे) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए गए हुए थे। वहां नीरू - नीमा को कमल के फूल पर शिशु रूप में कबीर परमात्मा मिले थे।इस लीला को ऋषि अष्टानन्द जी ने आंखों देखा। वहाँ से,
गरीब, गोद लिया मुख चूंबि कर, हेम रूप झलकंत।
जगर मगर काया करै, जैसे दमकैं पदम अनंत।।
गरीब, काशी उमटी गुल भया, मोमन का घर घेर।
कोई कहै ब्रह्मा बिष्णु हैं, कोई कहै इन्द्र कुबेर।।
कबीर परमेश्वर शिशु रूप में काशी में अवतरित हुए तो उनको देखने के लिए पूरी काशी के लोग उमड़ उमड़ कर आ रहे थे। ऐसा अद्भुत बच्चा उन्होंने आज तक नहीं देखा था। बच्चे का शरीर सफेद बर्फ की तरह चमक रहा था,
पूरी काशी कबीर परमात्मा के नवजात रूप को देखने को उमड़ पड़ी थी। स्त्री-पुरूष झुण्ड के झुण्ड बनाकर मंगल गान गाते हुए नीरू के घर बच्चे को देखने को आए।
गरीब दूनी कहै योह देव है, देव कहत हैं ईश।
ईश कहै पारब्रह्म है, पूरण बीसवे बीस।
कसाई का उद्धार गरीब, राम नाम सदने पीया, बकरे के. उपदेश !अजामेल से उधरे, भक्ति बंदगी पेश।।
अवधु अविगत से चल आया,कोई मेरा भेद मर्म नहीं पाया।।
ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा,बालक ह्नै
दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा,तहाँ जुलाहे ने पाया।।
माता-पिता मेरे कछु नहीं, ना मेरे घर दासी।
जुलहा को सुत आन कहाया,जगत करे मेरी हाँसी!!
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब का आज के दिन इस पृथ्वी पर अवतरण हुआ था वो सशरीर आये और सशरीर ही सतलोक गये। कबीर साहेब ही जगतपिता है सारी सृष्टि के,
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