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पुर्ण परमात्मा कबीर साहेब किस किस को मिले ?

 

    बिठल होकर रोटी खाई, नामदेव की कला बढ़ाई।
    पुंण्डरपुर नामा प्रवान, देवल फेर छिवा दई छान।।

 1.कोढ़ की असहनीय पीड़ा से दुखी सैकड़ों व्यक्तियों को.         परमात्मा ने रोगमुक्त किया और अपनी शरण में लिया

द्रोपदी का चीर बढ़ाना 


2.एक बार द्रौपदी ने अंधे महात्मा को अपनी साड़ी के कपड़े में से टुकड़ा दिया था क्योंकि अंधे महात्मा की कोपीन पानी में बह गई थी। साधु ने आशीर्वाद अनंत चीर पाने का आशीर्वाद दिया। कबीर परमात्मा ने चीरहरण में द्रौपदी का चीर बढ़ाकर लाज बचाई।। द्रोपदी का चीर भी परमात्मा कबीर जी ने बढ़ाया। द्रोपदी श्री कृष्ण की भक्त थी। इसलिए बड़ाई कृष्ण को मिली।

3.बली राजा की यज्ञ में बावना बने। फिर विशाल रूप किया। गज तथा मगरमच्छ युद्ध कर रहे थे तो उनकी भी गति भक्ति अनुसार की।

     गरीब, पीतांबर कूं पारि करि, द्रौपदी दिन्हीं लीर।
       अंधे कू कोपीन कसि, धनी कबीर बधाये चीर।।


 4.गोरख नाथ को भी पुर्ण परमात्मा मिले व ज्ञान समझाया
    गरीब, कल्प करी करुणामई, सुपच दिया उपदेश।
     सतगुरु गोरख नाथ गति, काल कर्म भये नेस।।




कबीर परमात्मा की अद्भुत लीलाएं?


धर्मदास को सदमार्ग दिखाना ...

भक्त धर्मदास जी बांधवगढ़ के धनी सेठ थे। देवी तथा
शिव-पार्वती की पूजा, तीर्थों व धामों पर जाकर स्नान करना आदि शास्त्रविरूद्ध साधना किया करता था।
धर्मदास जी जब तीर्थ यात्राओं पर निकले तो परमात्मा कबीर जी जिंदा महात्मा के वेश में उन्हें मिले और बार-बार ज्ञान की चोट की, सतलोक के दर्शन कराए और अपनी शरण में लिया।

तेरह गाड़ी कागजों को लिखना
    एक बार दिल्ली के बादशाह ने कहा कि कबीर जी ढ़ाई दिन में तेरह गाड़ी कागजों को लिख दे तो मैं उनको परमात्मा मान जाऊंगा । परमात्मा ने गाड़ियों में रखे कागजों पर अपनी डण्डी घुमा दी। उसी समय सर्व कागजों में अमृतवाणी सम्पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान लिख दिया। राजा को विश्वास हुआ।


पुर्ण परमात्मा द्वारा दादू जी का उद्धार?




दादू जी को परमात्मा कबीर जी ज़िंदा महात्मा के रूप में मिले और ज्ञान समझाकर सतलोक लेकर गए  दादू साहेब ने अपनी वाणी में कबीर साहेब की महिमा के बारे में !
अधिक जानकारी के लिए देखिए श्रद्धा चैनल 2:00 बजे


कबीर परमेश्वर ने 5वर्ष की आयु मे ग्यान चर्चा ?



एक बार परमात्मा कबीर साहेब जी जब 5 वर्ष की आयु के थे उस समय उन्होंने 104 वर्ष की आयु के रामानंद जी के साथ ज्ञान चर्चा की, उनके साथ कई लीलाएं की, अपना परिचय करवाया तथा सतलोक दिखाया तब रामानंद जी को दृढ़ विश्वास हुआ कबीर साहिब सृष्टि रचनहार पूर्ण ब्रह्म हैं।

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