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कबीर  साहेब का प्रकट होना ?
कलयुग में कबीर परमेश्वर अपने वास्तविक नाम कबीर रूप में काशी नगरी में लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर अवतरित हुए।
कलयुग में निसंतान दंपति नीरू और नीमा ने उनका पालन पोषण किया।

          मात-पिता मेरे नहीं बालक रूप प्रकटाया,
        लहरतारा तालाब कमल पर तहाँ जुलाहे ने पाया।।


अल-खिद्र(कबीर प्रभु) को जिंदा पीर भी कहा जाता है।
 वह अविनाशी परमात्मा हैं। अनेकों रूप बनाकर कबीर परमात्मा ही सब लीला करते रहते हैं।

परमेश्वर कबीर साहिब जी चारों युगों में नामांतर करके शिशु रूप में प्रकट होते हैं और एक-एक गवाह बनाते हैं जिससे कबीर पंथ का प्रचार होता है।
सतयुग - सहते जी
त्रेता - बंके जी
द्वापर - चतुर्भुज जी
कलियुग - धर्मदास जी

अधिक जानकारी के लिएअवश्य देखिये संत रामपाल  जी महाराज के सत्संग निम्न chennl पर
sadhna chennl 7:30से 8:30
ishwar chennl 8:30से 9:30


अव्श्य  पढ़िए पुस्तक gyan ganga 


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